पाग नेपालभारतक मिथिला क्षेत्रमे बसोबास करऽवला मैथिलसभद्वारा माथ पर पहिरल जाएत अछि। एकरा हिन्दू वेद तथा संस्कृत भाषामे सिरवश्त्रम कहल गेल अछि। एकर प्रयोग मिथिलाक पारम्परिक सभ्यताक प्रदर्शित करैत अछि। ई सम्मान आ गर्वक प्रतीक अछि।[१]

मिथिलाक लाल पाग

इतिहास आ शैली

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प्राचीन समयमे एकरा पात आदिसँ बनाएल जाएत छल, मुदा एखन एकरा कपड़ासँ बनाएल जाए लागल अछि।[२] विशेष रूपसँ ई लाल, पियड़ अथवा उजर रङ्गक भैटेत अछि। पागक संस्कृति बचेवाक लेल विभिन्न अभियान चलाएल जा रहल अछि। कालान्तरमे मुख्य रूपसँ पाग मिथिला क्षेत्रक ब्राह्मणकायस्थ समुदायद्वारा[३] लगाएल जाइत छल मुदा वर्तमान समयमे एकर प्रयोग मिथिलाक प्रत्येक समुदायद्वारा कएल जाइत अछि।[४]लाल रङ्गक पाग दुल्हा आ पूजा पाठमे पुरुषद्वारा लगाएल जाएत अछि। पियड़ रङ्गक पाग मुख्य रूपसँ विआह उत्सवमे सम्मिलित होमएवला लोकसभद्वारा लगाएल जाइत अछि तँ छोट बच्चा आ मनुष्यसभ उजर रङ्गक पाग लगबैत अछि।[५]

सन्दर्भ सामग्रीसभ

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  1. http://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/Donning-Mithilas-paag-in-Houses/articleshow/53480415.cms
  2. "Archive copy"मूलसँ 2018-03-07 कऽ सङ्ग्रहित। अन्तिम पहुँच 2020-11-17{{cite web}}: CS1 maint: archived copy as title (link)
  3. http://shodhganga.inflibnet.ac.in/bitstream/10603/16641/7/07_chapter%203.pdf
  4. http://www.jansatta.com/duniya-mere-aage/pagg-tradition-in-mithila/47943/
  5. "Archive copy"मूलसँ 2017-08-02 कऽ सङ्ग्रहित। अन्तिम पहुँच 2020-11-17 {{cite web}}: Unknown parameter |dead-url= ignored (|url-status= suggested) (help)CS1 maint: archived copy as title (link)

एहो सभ देखी

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