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== इतिहास ==
धनुषा जिलाक धार्मिक सांस्कृतिक भौगालिक आर्थिक तथा सामाजिक व्यवस्था मानव सभ्यताक हरेक युग कालसँ प्रभावित भऽ परिष्कृत होएत आएल पवैतदेखल गेल अछि । [[भारत]]मे रहल [[अयोध्या]]क राजकुमार रामचन्द्रसंगरामचन्द्र संग जानकीक विवाह पश्चात ई क्षेत्रक गरिमा अखनो उत्कर्षमे पहुँचल पवैतकायम अछि । धनुषा जिलाक हालक स्वरूप [[कोशी नदी|कोशी]] सँ [[गण्डकी नदी|गण्डकी]] आ गङ्गासँ[[गङ्गा]]सँ हिमालयधरि फैलल बृहत [[मिथिला]] प्रदेशक युगान्तमे कम होएत गेल छोट स्वरूपस्वरूपे हीबांकी अछिरहल कहिकतथ्य कएलदेखल गेल अछि।अछि । किम्बदन्ती अनुसार पूर्व वैदिक युगमे मानव विहीन रहल ई क्षेत्रक अन्वेषण माथव विदेध केनए छल । मुखमे अग्नी लऽ ई वनसँ झांपल गेल अनकन्टार प्रदेशमे आवैतअवैत काल हुनकर मुखमे रहल अग्नी बाहर आविआबि सम्पूर्ण वनक विनाश भेलाक पश्चात एतय मानव बसोवास शुरु भेल छल । त्रेतायुगमे राजा जनकक विद्वता आ जानकीक धार्मिक सम्लग्नताकसंलग्नताक कारण ई क्षेत्र दूर-दूरधरि प्रख्यात भेल पवैत अछि।
 
सत्रम्सत्रहम शताब्दीक शुरुमे भारतसँ महात्मा सुरदासक आगमन पश्चात ई क्षेत्रक इतिहासमेइतिहास सफाप्रस्ट होएत गेल देखल गेल जाइत अछि । किम्बदन्ती अनुसार जानकीक जन्मस्थानक खोजीमे महात्मा सुरदास घुमैत काल एकदिन राति सपनामे जानकी स्वयम् प्रकट भऽ सुरदासक ओ स्थान देखेने छल । ओहीओहि बखत सुरदास ओ स्थानमे खन्ती गाडिगाड़ि चिन्ह लगाकऽ जानकीक प्रतिस्थापित कएने छल। राज्यसभक उदय विलय क्रमसँगेक्रमसंगे ई प्रदेशक शासक भौगोलिक सीमा परिवर्तन होएत गेल। नेपाल एकीकरण होएसँ पहिने ई प्रदेश मकवानपुर राज्यक अधीनमे छल। मकवानपुरक राजा मानिक सेन [[जानकी मन्दिर]]क लेल १४०० बिघा जमीन उपलब्ध कएनेकरौने छल। वि.सं. १८८२ मे [[अमरसिंह थापा]] प्यागोडा शैलीमे राममन्दिरक निर्माण कएनेकेनए छल तँ वि.सं. १९५०मे१९५० मे टिकमगढकी महारानी वृषभानु देवी ९ लाख रूपैयाँ लगाकलगाए हालकवर्तमानक भव्य मुगलकालीन शैली झलकेवालाशैलीमे जानकी मन्दिर निर्माण करेनेकरौने छल।छल हालक धनुषा जिला धार्मिक ऐतिहासिक मिथिला प्रदेशक छोट भू-भाग ओगटनेओकटने होएतो ई जिला ई प्रदेशक बीचक रूपमेमध्य रहलभागमे पवैतअवस्थित अछि।
 
== भौगोलिक अवस्थिति ==