"आयुर्वेद" के अवतरणसभमे अन्तर

कुनो सम्पादन सारांश
२. शालाक्यतन्त्र- गर्दनसँ उपरक अङ्ग जना:- नाक, कान, आँख, मुख, गर्दन आ शर आदिमे भेल रोगसभके निक करैके तन्त्रके शालाक्य तन्त्र कहैत अछि।
 
३. कायचिकित्सा- कायक अर्थ जठराग्नि छी। ओकर दोष मन्दाग्नि आदिक कारण उत्पन्न भेल सर्वाङ्गत ज्वर, रक्तपित्त, शोष, उन्माद, अपस्मार, कृष्ठ, प्रमेह, अतिसार आदि शारीरिक मानसिक रोगसभक निदान आ चिकित्साक वर्णन जे अङ्गमे भेल अछि तेकरा कायचिकित्सा कहैत अछि।
==सन्दर्भ सामग्रीसभ==
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