"आयुर्वेद" के अवतरणसभमे अन्तर

कुनो सम्पादन सारांश
 
१. शल्य तन्त्र- शारीरिक आ मानसिक कष्टक कारणके शल्य कहैत अछि। अर्थात् प्राणी मात्रक शरीरमे काठ, ढुङ्गा, फलाम आदिसँ भेल व्रण, दृष्ट व्रण आ गर्भरूप शल्यक निवारणक लेल यन्त्र, क्षार आ अग्निक उपयोगद्वारा उपचार करै उपायसभक उपदेश शल्यतन्त्रमे केने अछि ।
 
२. शालाक्यतन्त्र- गर्दनसँ उपरक अङ्ग जना:- नाक, कान, आँख, मुख, गर्दन आ शर आदिमे भेल रोगसभके निक करैके तन्त्रके शालाक्य तन्त्र कहैत अछि।
 
==सन्दर्भ सामग्रीसभ==
१३,८३९

सम्पादन