"आयुर्वेद" के अवतरणसभमे अन्तर

कुनो सम्पादन सारांश
''अतुरस्य विकार प्रशमन च ।।''
पहिल उद्देश्य प्राप्तिक लेल दिनचर्या, रात्रिचर्या, ऋतुचर्या, सद्वृत्त आदिक पालन करै सकै छी। दोसर उद्देश्य प्राप्तिक लेल रोग व्याधिअनुसार विभिन्न चिकित्साका उपायसभ एव विभिन्न द्रव्यसभक प्रयोगद्वारा करै सकैत अछि।
==आयुर्वेदका अंगसभ==
आयुर्वेदक ८ टा अंगसभ अछि। प्रत्येक अङ्गसभक सङ्क्षिप्त परिचय निम्नानुसार अछि-
 
==सन्दर्भ सामग्रीसभ==
१३,८३९

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