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कुनो सम्पादन सारांश
==आयुर्वेदक इतिहास==
आयुर्वेदक रचनाकाल ईस पूर्व ३,००० सँ ५०,००० वर्ष पहिल भेल मानैत अछि। <ref>{{cite book|title=आयुर्वेद इतिहास एंव परिचय|author= डा. रविदत्त त्रिपाठी}}</ref> ब्रह्मा आयुर्वेद ज्ञानक मुख्य स्रोत छथि। ब्रह्मा ई ज्ञान दक्ष प्रजापतिके देलक। प्रजापति आयुर्वेदक ज्ञान अश्वनी कुमारसभके प्रदान केलक आ अश्वनी कुमारसभ भगवान इन्द्रके । भगवान इन्द्र ई ज्ञान के -केकरा प्रदान केलक बारे विभिन्न मतसभ रहल अछि । चरक सन्हिता अनुसार अश्वनी कुमारसभ आयुर्वेदको ज्ञान भगवान इन्द्र, भारद्वाज आ आत्रेयके प्रदान केलक। <ref>{{cite book|title=आयुर्वेदको वैज्ञानिक इतिहास|author= आचार्य प्रियव्रत शर्मा}}</ref><ref>{{cite book|title=हिस्ट्री अफ इन्डियन मेडिसिन|author= गिरिन्द्रनाथ मुखोपाध्यय}}</ref><ref>{{cite book|title=आयुर्वेदिक मेडिसिन-पास्ट एण्ड प्रिजेन्ट|author= पण्डित शिव शर्मा}}</ref> अत्रेय आयुर्वेदक विधा अपन ६ शिष्यसभके देलक। ओसभ छल – अग्निभेष, भेल, अतुकर्ण, परासर, हारित आ क्षारपाणी। सुश्रुत संहिता अनुसार कहलक भगवान इन्द्र अपन प्राप्त कएल आयुर्वेदक ज्ञान धनवन्तरीके प्रदान केलक। धनवन्तरी ई ज्ञान अपन ७ जना शिष्य – औषधेनव, वैतरण, उरभ, गोपूररक्षित्, पौषकलावत, करविर्य आ सुश्रुतके प्रदान केलक। कश्यप संहिता अनुसार इन्द्रमार्फत ई ज्ञान कश्यप, वशिष्ठ, भृगु, अत्रिके प्राप्त भेल । <ref>{{cite book|title=काश्यप संहिताक उपोद्घात|page=३३५|author= पण्डित हेमराज शर्मा}}</ref> चरक, सुश्रुत, वागभट आयुर्वेदके अथर्ववेदक उपवेद रुपमे मान्ने अछि कश्यप एकरा छुटै वेदक रुपमे परिभाषित केने अछि।
 
==आयुर्वेदक सिद्धान्त==
आयुर्वेदक अनुसार मानव शरीर त्रि-दोष, सप्त धातु आ मलसँ निर्मित अछि। त्रि-दोषक सिधान्त ही आयुर्वेदक मुख्य आधार छी। बात, पित्त आ कफ त्रि-दोषसभ छी। प्रत्येक लोगमे कुनै एक या दुइ दोषसभ प्रभावशालि होएत अछि। चिकित्सकसभ विरामीक दोष अनुसारहि रोग निदान करैत अछि। <ref>{{cite book|last1= शर्मा|first1=डा. विनोद |title=कार्य क्षेमता के लिए आयुर्वेद और योग|date=2007|publisher= राजकमल प्रकाशन|location=भारत|isbn=978-81-8361-143-5|page= १८६|url=http://books.google.co.in/books?id=fvH0B25xtaMC&source=gbs_navlinks_s|accessdate=8 January 2015}}</ref> सप्त धातुसभ रक्त, रस, मंस, मेद, अस्थी, मज्जा आ शुक्र छी । तहिना , मानव शरीर [[पञ्चमहाभूत|पञ्चमहाभूत]]सभ सँ बनैत अछि ।
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