भारतक महाराज्यपाल

भारतक महाराज्यपाल या गभर्नर-जनरल (१८५८-१९४७ धरी वाइसरय आ गभर्नर-जनरल अर्थात राजप्रतिनिधि आ महाराज्यपाल), ब्रिटिशकालीन भारतमे ब्रिटिश शासनक प्रधान तथा भारतीय स्वतन्त्रता उपरान्त भारतमे, ब्रिटिश सम्प्रभुक प्रतिनिधिक पद छल। ई पदक प्राथमिक स्थापना १७७३मे फोर्ट विलियमक गभर्नर-जनरलक रूपमे भेल छल। तद कालमे सैद्धान्तिक रूपसँ, फोर्ट विलियमक गभर्नर-जनरलक अधीन केवल फोर्ट विलियमक प्रेसिडेन्सीक(बङ्गाल) अधिकार रहल छल आ अन्य ब्रिटिश प्रेसिडेन्सीसभ ओकर से स्वतंत्र छल, मुदा आधिकारिक रूपसँ, तत्कालीन भारतक समस्त ब्रिटिश प्रेसिडेन्सीक गभर्नरसभक केवल फोर्ट विलियमक गभर्नरक स्वीकृतिक स्थितिमे ही निर्णय लेवेक स्वतंत्रता रहल छल। सम्पूर्ण ब्रिटिश राजक उपर पूर्ण आधिकारिक अधिकार एकरा सन् १८३३मे देयल गेल, जेकर बाद ई पदक नाम आधिकारिक रूपसँ भारतक गभर्नर-जनरल(भारतक महाराज्यपाल) भेलै। एकर पहिल धारक छलैन व्यारन ह्यास्टिङ्ग्स तथा अंतिम धारक छलैन चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

भारतक राजप्रतिनिधि आ महाराज्यपाल
Viceroy and Governor-General of India
ध्वज
महाराज्यपाकल ध्वज
 
वार्रन हास्टिंग्स

व्यारन ह्यास्टिङ्ग्स, फोर्ट विलियमक महाराज्यपालक रूपमे ई पदक प्रथम पदाधिकारी छलैन(१७७४-१७८५)। तेखन इस्ट इन्डिया कम्पनी, मुगल सम्राटक अनुमतिसँ, मुगल बादशाहक प्रतिनिधिक रूपमे भारतक अनेक भागसभपे शासन करैत छल। सन १७७३मे, कम्पनीमे भ्रष्टाचारक बात सामने आएक कारण, ब्रिटिश सरकार रेगुलेशन अधिनियमक अन्तर्गत, आंशिक रूपसँ कम्पनीक नियन्त्रण अपन अन्तर्गत ले लेलक। उक्त अधिनियमक अन्तर्गत, गभर्नर-जनरलसभक कम्पनीक निदेशकगणद्वारा चयित करिकऽ निर्णय लेल गेलइ। तथा गभर्नर आ परिषदक लेल पाँच वर्षीय कार्यकाल निश्चित करल गेल छल, तथा शासनक लगे महाराज्यपाल कऽ मध्यावधिमे पदोचित करिकऽ पूर्णाधिकार रहल।

फाइल:Viceroy Lord Canning meets Maharaja Ranbir Singh of Kashmir, 9 मार्च 1860.jpg
लर्ड क्यानिङ्ग, कश्मीरक तत्कालीन महाराज रणाबीर सिंह सँ भेँट करैत, ९ मार्च १९६०

१८३३क चार्टर एक्ट अधिनियमद्वारा फोर्ट विलियमक गभर्नर-जनरल आ परिषद् कऽ उपादिक परिवर्तित करिकऽ भारतक गभर्नर-जनरल आ परिषद् कर देल गेलइ आ ओकरा शासनक अनुमोदनक विषय बना देल गेलै, परंतु ओकर चयन आ नियुक्तिक अधिकारसभ कम्पनीक निदेशकसभक हाथे छल।

१८५७ कऽ स्वतन्त्रता सङ्ग्रामक पश्चात ईस्ट इन्डिया कम्पनीक समाप्त कर देल गेलै आ भारतक शासनक समस्त अधिकार सीधे लन्दन-स्थित ब्रिटिश सरकारक अन्तर्गत आ गेल। आ गभर्मेन्ट अफ इन्डिया एक्ट, १८४८ द्वारा महाराज्यपालक नियुक्ति ब्रिटिश सरकार आ सम्प्रभुक अधीन कर देल गेलै। सन १९४७मे भारतक उपर ब्रिटिश सरकारक नियन्त्रण समाप्त भेल आ भारत तथा पाकिस्तानक शासन दोनों देशक निर्वाचित सरकारक अधीन आ गेल, परन्तु ब्रिटिश सम्प्रभु(जेहिके एखन भारत आ पाकिस्तानक सम्प्रभु केहो उपादि दे देल गेल छल) द्वारा नियुक्त भारतक महाराज्यपालक(आ पाकिस्तानक महाराज्यपालक) पद दू देशसभक सम्विधानक परावर्तन धरी अस्तित्वमे रहल। भारतक नव सम्विधान २६ जनवरी १९५०मे एकटा धर्मनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणराज्यक रूपमे स्थापित भेल आ पाकिस्तान १९५६मे इस्लामी गणराज्यक रूपमे स्थापित भेलै।

राजप्रतिनिधि

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लर्ड कर्जन, भारतक राजप्रतिनिधिक वेशभूषामे, एकर कार्यकाल १८९९-१९०५ धरी चलल

अधिकांश भारत पर ब्रिटिश शासनक प्रत्यक्ष नियंत्रण ना रहल छल, वास्तविक प्रशासनक प्रभार व अधिकार छल ओकर अधीनस्त अधिकारी आ अफसरसभक हाथे। तथा भारतक अधिकांश भूभागपे स्थानिया भारतीय शासकसभक राज छल जेसभ सन्धिद्वारा ब्रिटिश मुकुटक अधीन छल। अतः भारतीय सामन्तसभ आ राजा-रजवाड़ासभक लेल ब्रिटिश सम्प्रभुक प्रतिनिधि रहेक कारणसँ, महाराज्यपाल(गभर्नर-जनरल) कऽ सन १८५८मे भारतक राजप्रतिनिधि आ महाराज्यपालक(वाइसरय अंड गभर्नर-जनरल अफ इन्डिया) उपादिसँ सम्बोधित करल जाए लगल। मुदा १९४७मे भारतक स्वतन्त्रता प्राप्तिक पश्चात् राजप्रतिनिधिक उपादिक उपयोक रोक देल गेलइ आ केवल महाराज्यपालक उपादि रह गेल। तथा ई पद महाराज्यपालक रूपमे २६ जनवरी सन १९५० धरी भारतीय सम्विधानक परवर्तन आ भारतक लोकतान्त्रिक गणराज्य घोषित भेला धरी अस्तित्वमे रहलै।

नियुक्ति, कार्यकाल आ महाभियोग

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१८५८ धरी, महाराज्यपालक ब्रिटिश इस्ट इन्डिया कम्पनीक निदेशकसभद्वारा चयित करल जाइत छल, तथा ओकर उत्तरदायित्व कम्पनीक उक्त निदेशकसभक प्रति छल। बादमे महाराज्यपालक चयन ब्रिटिश सम्प्रभु, ब्रिटिश क्याबिनेट आओर भारतक राज्यसचिव सभक निर्णयद्वारा ओकर नियुक्ति होए लगल। १९४७ पश्चात महाराज्यपालक नियुक्ति ब्रिटिश सम्प्रभु(जे भारतक सम्प्रभु भी छलैन) द्वारा भारतीय मंत्रीगणक सलाहपे करल जाय लगल।

महाराज्यपालक कार्यकाल सामान्यतः पाँच वर्षक लेल छल। तथा केहु पदाधिकारी कऽ ओकर कार्यकाल समाप्त होएक पहिनेओ महाभियोगद्वारा पदोचित करेकऽ प्रावधान छल। पुरान महाराज्यपालक कार्यकाल-समाप्ति आ नव पदाधिकारिक नियुक्तिक बीचमे एकटा अस्थायी गभर्नर-जनरलक नियुक्त करल जाइत छल, जेकरा प्रायः प्रान्तीय राज्यपालसभसँ कऽ मध्यसँ चुनल जाइत छल।

अधिचिह्न

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एहो सभ देखी

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सन्दर्भ सामग्रीसभ

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बाह्य जडीसभ

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