धृष्टद्युम्न जकरा द्रौपदक नामसँ सेहो जानल जाइत अछि पाञ्चालराज द्रुपदक अग्नि तुल्य तेजस्वी पुत्र छी ।[१] ओ पृषत अथवा जन्तु राजाक नाती, आ द्रुपद राजाक पुत्र छल । द्रोणाचार्यक विनाश करवाक लेल, प्रज्वलित अग्निकुण्डसँ एकर प्रादुर्भाव भेल छल । फेर ओहि वेदीमे सँ द्रौपदी प्रकट भेल छल । अतः ई दुनू कें 'अयोनिसम्भव' आ एकरा द्रौपदीक 'अग्रज बन्धु' कहल जाइत अछि । अग्निक अंश सँ एकर जन्म भेल छल । एकरा 'याज्ञसेनि', अथवा 'यज्ञसेनसुत' सेहो कहैत छल । द्रोणसँ बदला लेबऽ कऽ लेल, द्रुपद याज आ उपयाज नामक मुनीसभद्वारा एक यज्ञ करौलक । ई यज्ञकें 'हविष्य' सिद्ध होइते, याज द्रुपदकें रानी सौत्रामणीकें, ओकर ग्रहण करवाक लेल बजेलक । महारानीक यज्ञमे अबैमे कनिक देर भऽ गेल । फेर याज क्रोधसँ कहल्नि - रानी! ई हविष्यकें यज तयार केनए अछि आ उपयाज ओकर संस्कार केनए अछि । याह कारण एकरासँ सन्तानक उत्पत्ति अनिवार्य अछि । अहाँ एकरा लै ल आबी, या नै आबी । एतेक कहि, याज ओ हविष्यक अग्निमे आहुति दऽ देलक । फेर ओकरा प्रज्वलित अग्निसँ, ओ एक तेजस्वी वीरपुरुष कऽ रुपमे प्रकट भेल । एकर अङ्गक कान्ति अग्निज्वालाक समान तेजस्वी छल । ओकर मस्तक पर किरीट, अङ्गसभमे उत्तम कवच, आ हातमे खड्ग, बाण आ धनुष छल । अग्निसँ बाहर आबैते, ओ गर्जना करैत एक रथ पर जे चढल मानू कतौ युद्ध कऽ लेल जाए लेल तयार होइ । ओहि समय, आकाशवाणी भेल - ई कुमार पाञ्चालसभक दुःख दूर करत । द्रोणवधक लेल एकर अवतार भेल अछि ई आकाशवाणी सुनि, उपस्थित पाञ्चालसभ कें बहुतेक प्रसन्नता भेल । ओ - साधु, साधु कहि, हुनका शाबाशी दै लगल ।[२]

धृष्टद्युम्न
Drishtadumnya
Drishtadumnya announces about the Draupadi Swayamvara.jpg
जानकारी
परिवारद्रुपद (पिता)


जीवनसंपादित करें

सन्दर्भ सामग्रीसभसंपादित करें

  1. "Positive thinking: Dhrishtadyumna", DNA, दिसम्बर ७, २०१२। 
  2. Debroy, Bibek (June 2015). The Mahabharata, Volume 4. United Kingdom: Penguin Books. 

बाह्य जडीसभसंपादित करें

एहो सभ देखीसंपादित करें