घुइर चलू घुइर चलू मैथिल अपन मिथिला देश बाट जोहै छथि माए मिथिला, आँचर मे लऽ स्नेहक सनेश। उजइर पुजइर गेल छै ओकर सभटा खेत पथार गाम घर सभ भक्क पड़ल छै डिबिया बाती नै जरै छै देख ई दशा माए मिथिला के फाटै छै कुहेश ।... जाहि धरा पर बहैत अछि सात सात धार आई ओहि धरा के छाती अछि सुखाएल खाए लेल काइन रहल अछि नेन्ना भुटका माइर रहल छथि माए मिथिला चित्कार । देखू देखू हे मिथिलावाशी केहन आएल काल देब भूमि तपोभूमि आई बनल आतंकक अड्डा जतऽ कहियो पशु पंछियोँ वाचैत छल शास्त्र आई ओहि धरा सँ सुना रहल अछि बम बारुदक राग । हे मैथिल! दोसरक नगरी रौशन केलौँ छोइड़ अपन देश आबो जँ नै आएब मिथिला तऽ भऽ जाएत मिथिला डीह कुहैर कुहैर क कहैथ माए मिथिला ई.. चलू चलू यौ मैथिल अपन मिथिला देश फेर सँ बनेबै ओहने मिथिला देखतै देश विदेश..जय मिथिला